बिहार
बिहार चुनाव परिणाम पर CPI(ML) की तीखी प्रतिक्रिया: “₹30,000 करोड़ की नकद हस्तांतरण योजना ने लोकतांत्रिक प्रकृति को दागदार किया”

PNS Bureau:- 15 नवंबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर CPI(ML-Liberation) ने जमीनी हकीकत से दूरी जताने वाले आरोप लगाए हैं। पार्टी महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा है कि यह परिणाम “बहुत ही अस्वाभाविक” है और इसमें SIR (Special Intensive Revision) का गहरा असर नजर आता है। (Deccan Herald)
मुख्य बिंदु — CPI(ML) की समीक्षा
- नकद हस्तांतरण पर आरोप:
पार्टी का आरोप है कि सरकार ने लगभग ₹30,000 करोड़ की नकद राशि सीधे लाभार्थियों को स्थानांतरित की, जिससे चुनाव नैतिकता और मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट की धज्जियाँ उड़ गईं। (The Times of India) - SIR की भूमिका:
CPI(ML) का यह भी कहना है कि SIR (Special Intensive Revision) कार्यक्रम के बाद मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ, जिससे चुनाव का निष्पक्ष आधार प्रभावित हुआ। (Deccan Herald) - सीपीआई(एमएल) का प्रदर्शन:
- पार्टी ने पालीगंज और कररकट में जीत दर्ज की। (The Times of India)
- अगिआन (SC) सीट सिर्फ 95 वोटों के अंतर से हार गई। (The Times of India)
- बलरामपुर, दुमरांव, और ज़ीरादेई जैसी सीटों पर भी हार का अंतर 3,000 वोटों से कम रहा। (The Times of India)
- पूरे राज्य में पार्टी की वोट शेयर लगभग 3 प्रतिशत रही। (The Times of India)
- लोकतंत्र एवं गठबंधन पर प्रतिबद्धता:
CPI(ML) ने बिहार की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि वह INDIA गठबंधन के साथ मिलकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने, लोगों के अधिकारों को सुरक्षित रखने और संवैधानिक नींव को मजबूत करने के लिए पूरी ऊर्जा और संकल्प के साथ काम करेगी।
निष्कर्ष
CPI(ML-L) का मानना है कि इस चुनावी नतीजे ने सिर्फ़ उनकी पार्टी को झटका ही नहीं दिया, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए हैं। नकद हस्तांतरण और मतदाता सूची में कथित हस्तक्षेप जैसे मुद्दे चुनावी निष्पक्षता को प्रभावित करते हैं। पार्टी ने अराप करने की बजाय आत्मनिरीक्षण का रास्ता चुना है और भविष्य में लोकतांत्रिक लड़ाई को नए जोश के साथ आगे बढ़ाने की बात कही है।(PNS)




